जिंदगी में घोलती मिठास आँखें,
हमें खास हो गई ये शनास आँखें।
कभी तुम्हारी इनमे तस्वीर होगी,
लगा के रखीं हैं ऐसी आस आँखें।
क्या तेरे हाथों में मेरा हाथ होगा,
ये लगा रहीं हैं कयास आँखें।
सपने हमेशा आशाओं के बुनती,
नहीं होती है ये इयास आँखें।
बता क्या हुआ है तेरे साथ ऐसा
क्यों तेरी इतनी बदहवास आँखें।
अभी तो इनमें भरी है गैरत,
हया का पहने लिबास आँखें।
दीप इनमें वफ़ाओं के जलते,
चमक रहीं हैं ये उजास आँखें।
ग़ज़ल में क्या कोई खासियत है,
परख रहीं हैं पचास आँखें।
🇮🇳CHANDAN KUMAR MISHRA🇮🇳
( शनास=पारखी, इयास=नाउम्मीद होना , उजास=रोशनी )
0 Comments